छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई नए साल में भी पूरी ताकत के साथ जारी है। साल 2026 की पहली बड़ी मुठभेड़ में सुकमा और बीजापुर जिलों में कुल 14 नक्सली मारे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से 12 नक्सली सुकमा जिले में और दो नक्सली बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों के साथ हुई अलग-अलग मुठभेड़ों में ढेर हुए। दोनों जगहों से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है, जब केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक माओवाद को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य तय किया हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बार-बार कह चुके हैं कि सरकार नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर तेजी से काम कर रही है। सुकमा में 12 नक्सलियों को मार गिराया इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, सुकमा जिले में यह ऑपरेशन 2 जनवरी की देर शाम शुरू किया गया था। सुकमा जिला रिजर्व गार्ड (DRG) को किस्ताराम इलाके के पामलूर गांव के पास नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी। इसके बाद सुरक्षाबलों की एक टीम ने इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। जैसे ही सुरक्षाबल नक्सलियों के ठिकाने के करीब पहुंचे, दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई। कई घंटों तक चली इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 12 नक्सलियों को मार गिराया। अधिकारियों ने बताया कि मारे गए नक्सलियों में कोंटा एरिया कमेटी का सचिव वेट्टी मंगडू उर्फ ‘मुक्का’ भी शामिल है, जिसे एक बड़े माओवादी कमांडर के तौर पर जाना जाता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मंगडू कई हिंसक घटनाओं में शामिल रहा था और लंबे समय से सुरक्षाबलों की हिट लिस्ट में था। उस पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे और वह पहले भी कई बार मुठभेड़ों के दौरान बच निकलने में कामयाब रहा था। आईईडी धमाके का मास्टरमाइंड था मंगडू सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मंगडू पिछले साल जून में कोंटा इलाके में हुए आईईडी विस्फोट का मास्टरमाइंड था। इस हमले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ACP) आकाश राव गिरिपुंजे की जान चली गई थी। उस घटना के बाद से ही सुरक्षाबल मंगडू की तलाश में लगातार अभियान चला रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंगडू कट्टर विचारधारा वाला माओवादी था और संगठन के भीतर उसकी पकड़ मजबूत थी। उसके मारे जाने को सुरक्षाबलों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। मुठभेड़ स्थल से AK-47, इंसास राइफल समेत कई आधुनिक ऑटोमैटिक हथियार बरामद किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि पूरे ऑपरेशन की निगरानी सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण कर रहे थे और इलाके में अब भी सर्च ऑपरेशन जारी है। बीजापुर में भी दो नक्सली ढेर सुकमा से एक दिन पहले बीजापुर जिले में भी सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। पुलिस के अनुसार, जिला रिजर्व गार्ड को बीजापुर के दक्षिणी जंगल इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की जानकारी मिली थी। इसके बाद एक विशेष टीम को नक्सल विरोधी अभियान के लिए रवाना किया गया। सुबह करीब 5 बजे सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई। इस मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए। घटनास्थल से उनके शव बरामद कर लिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में अभी भी तलाशी अभियान जारी है और संभावना है कि अन्य नक्सली आसपास के जंगलों में छिपे हो सकते हैं। नक्सलियों के खिलाफ तेज हुई कार्रवाई छत्तीसगढ़ में बीते कुछ सालों से सुरक्षाबलों ने नक्सल प्रभावित इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। बेहतर खुफिया जानकारी, आधुनिक तकनीक और स्थानीय पुलिस बलों के सहयोग से ऑपरेशन ज्यादा प्रभावी हो रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में छत्तीसगढ़ में अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 285 नक्सली मारे गए थे। इनमें से 257 नक्सली बस्तर संभाग में ढेर हुए थे, जिसमें बीजापुर, सुकमा समेत सात जिले शामिल हैं। सरकार का दावा है कि नक्सली गतिविधियों में लगातार गिरावट आई है और संगठन की कमर अब टूटने लगी है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां अब भी सतर्क हैं और जंगलों में छिपे नक्सली समूहों के खिलाफ अभियान जारी रखने की बात कह रही हैं। इन ताजा मुठभेड़ों को सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अंतिम लक्ष्य नक्सल हिंसा को पूरी तरह खत्म करना है, ताकि प्रभावित इलाकों में शांति और विकास की रफ्तार तेज हो सके। Post navigation “आप मनोनीत हैं, हम निर्वाचित हैं” — चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद TMC का तीखा हमला 500 रुपये के नोट पर अफवाह: मार्च 2026 से नोट बंद होने का दावा फर्जी, PIB ने किया खंडन